प्राचीन श्री हनुमान मंदिर, हांसी में गोवर्धन अन्नकूट उत्सव

अन्नकूट पर्व भगवान श्रीकृष्ण जी को समर्पित एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसे दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन को गोवर्धन पूजा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रजवासियों में इंद्र देव की पूजा की परंपरा थी, जिससे प्रसन्न होकर इंद्र वर्षा करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि हमें इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत, गौ माता और प्रकृति की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारे जीवन का आधार हैं। इसी बात से क्रोधित होकर इंद्र देव ने मूसलाधार वर्षा कर दी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को धारण कर लिया और उसकी छाया में समस्त गोकुलवासियों, ग्वाल-बालों एवं पशुओं की रक्षा की। सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को धारण करने के बाद जब इंद्र देव को अपनी भूल का एहसास हुआ, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा याचना की।

गोवर्धन अन्नकूट – पावन झलकियाँ