मन्दिर का इतिहास
यह मन्दिर लगभग वर्ष 1918 के आसपास बाबा मंगल सेन जी के चार सुपुत्रों —
स्वर्गीय श्री दुनी चंद जी बिंदल, स्वर्गीय श्री मुनी चंद जी बिंदल ,स्वर्गीय श्री सोहन लाल जी बिंदल, स्वर्गीय श्री बाल मुकंद जी बिंदल द्वारा बनवाया गया था। तत्पश्चात दिनांक 29 नवम्बर 1973 को इस मन्दिर को एक ट्रस्ट के रूप में विधिवत स्थापित किया गया। मूल ट्रस्ट डीड 29 नवम्बर 1973 को चार सेटलर्स तथा तीन अतिरिक्त ट्रस्टियों द्वारा निष्पादित की गई, इस प्रकार ट्रस्ट में कुल सात ट्रस्टी नियुक्त किए गए।
ट्रस्ट के मूल ट्रस्टी निम्नलिखित थे: ट्रस्ट के मूल ट्रस्टी
लाला नुनिया मल बिंदल
(पुत्र: लाला दुनी चंद बिंदल | पौत्र: स्व. बाबा मंगल सेन जी बिंदल)
श्री महाबीर प्रसाद बिंदल
(पुत्र: लाला राम स्वरूप बिंदल | पौत्र: लाला मुन्नी लाल बिंदल)
लाला अमरनाथ बिंदल
(पुत्र: लाला बाबू राम | पौत्र: लाला मुन्नी लाल बिंदल)
लाला सत्य नारायण बिंदल
(पुत्र: लाला बेली राम | पौत्र: लाला सोहन लाल जी)
लाला मदन लाल गुप्ता
(पुत्र: लाला हरि राम | पौत्र: लाला चंदू लाल जी)
लाला रघुबीर सिंह गोयल
(बिंदल परिवार के दामाद)
मंदिर सेवा समिति
यद्यपि अब ट्रस्ट के मूल सेटलर्स में से अधिकांश का देहांत हो चुका है, फिर भी उनके वंशजों ने इस मंदिर को
अपने पूर्वजों की अमूल्य धरोहर मानते हुए आज तक पूर्ण निष्ठा, श्रद्धा एवं समर्पण भाव से इसका संरक्षण,
संचालन एवं संवर्धन किया है।
श्री महाबीर प्रसाद
(पुत्र: स्वर्गीय श्री राम स्वरूप बिंदल)
श्री अनिल कुमार
(पुत्र: श्री महाबीर प्रसाद)
श्री सनत कुमार बिंदल
(पुत्र: स्वर्गीय श्री भगत राम बिंदल)
श्री भारत गुप्ता
(पुत्र: स्वर्गीय श्री मदन लाल गुप्ता)
श्री अशोक गुप्ता
(पुत्र: स्वर्गीय श्री रघुनंदन लाल गुप्ता)
श्री दरबार की झलक







