सनातन उत्सव

रामलला प्राण प्रतिष्ठा

अयोध्या में श्री रामलला की भव्य प्राण प्रतिष्ठा पूरे विश्व में जय–जयकार के साथ 21 जनवरी 2023 सम्पन्न हुई। इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा–अर्चना की गई, भंडारे लगाए गए और दीप प्रज्ज्वलित किए गए।

राम नवमी

भगवान श्रीराम के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में चैत्र मास में राम नवमी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। अयोध्या सहित देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा–अर्चना, भजन–कीर्तन और अखंड ज्योति प्रज्ज्वलन का आयोजन किया जाता है।

नवरात्र एवं अखंड ज्योति

माँ भगवती के नवरात्रे वर्ष में दो बार — चैत्र और शारदीय ऋतु में — पूरे देशभर में बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाए जाते हैं। भक्तजन इन पावन दिनों में माँ भगवती के व्रत, पूजन और निरजल उपवास रखते हैं।

अखंड ज्योति

यह प्राचीन मंदिर अपनी परंपरा और प्राचीनता के लिए विख्यात है। हमारे सनातन धर्म में अखंड ज्योति का विशेष महत्व बताया गया है। भक्तजन देवी–देवताओं की प्रसन्नता हेतु अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करते हैं
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हवन कार्यक्रम

सनातन धर्म में हवन को अत्यंत पवित्र और शक्तिपूर्ण अनुष्ठान माना गया है। हवन करने से वातावरण शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, तथा घर–परिवार में शांति, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
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जन्माष्टमी

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण की पावन स्मृति में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया जाता है तथा भजन-कीर्तन, श्रीकृष्ण कथा और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है।

शरद पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा का पर्व चंद्रमा की पूर्ण कलाओं और शीतल प्रकाश के साथ आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
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हनुमान जन्मोत्सव

हनुमान जन्मोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, बल, बुद्धि और सेवा का प्रतीक है। भगवान श्रीहनुमान जी को संकटमोचन, रामभक्त और असीम शक्ति के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। उनका जन्मोत्सव हमें निःस्वार्थ सेवा, अटूट विश्वास, विनम्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है

गोवर्धन अन्नकूट

अन्नकूट पर्व भगवान श्रीकृष्ण जी को समर्पित एक अत्यंत पावन पर्व है, जिसे दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन को गोवर्धन पूजा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रजवासियों में इंद्र देव की पूजा की परंपरा थी, जिससे प्रसन्न होकर इंद्र वर्षा करते थे।